Hindi हिंदी क्षितिज-2

प्रश्न 3-4: दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।

उत्तर 3-4: वसंत के परंपरागत वर्णन में कवि चारों ओर हरियाली, मौसम की अद्भुत छटा, फूलों का खिलना, शीतल हवाओं का बहना, झूले झूलना, नायक-नायिकाओं का मेल मिलाप आदि को दर्शाते हैं। परन्तु दूसरे कवित्त में ऋतुराज वसंत को कामदेव के बालक के रूप में चित्रित किया गया है। उनके साथ प्रकृति वह सब करती है जैसा एक नन्हे शिशु के साथ किया जाता है। प्रकृति उन्हें वृक्षों को पलना, पत्तों की शय्या, फूलों का वस्त्र, वायु द्वारा झूला झुलाना, मोर, तोते और कोयल द्वारा मनोरंजन करते दिखाया गया है।


प्रश्न 3-5: 'प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै' - इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर 3-5: इस पंक्ति में कवि ने बताया है कि शिशु रूपी वसंत को प्रातःकाल गुलाब चुटकी बजाकर जगाते हैं। सुबह-सुबह फूल खिलते समय जो चट की आवाज आती हैं उसे कवि चुटकी बजना कहते हैं।


प्रश्न 3-6: चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?

उत्तर 3-6: कवि देव चाँदनी रात की सुंदरता को निम्नलिखित रूप में देखते हैं -
• आकाश में फैली चाँदनी को स्फटिक (क्रिस्टल) नामक शिला से बने मंदिर के रूप में देखते हैं।
• चारों ओर फैली चाँदनी को देखकर ऐसा लगता है मानों दही का सागर उमड़ता चला आ रहा हो।
• पूरे आकाश में फैली चाँदनी को देखकर ऐसा लग रहा है मानों आकाश रूपी आँगन में दूध का झाग फ़ैल गया हो।
• चाँदनी रात रूपी मंदिर में झिलमिलाते तारे ऐसे लग रहे हैं मानो वे सब सजी-धजी युवतियाँ हों जिनकी आभषूणों की आभा मल्लिका फूल के रस से मिली ज्योति की समान है।